black fever

कालाजार:- कालजार उष्ण प्रदेशों में विशेषतः बिहार,बंगाल,आसाम एवं श्रीलंका आदि में अधिक पाया जाता है।यह धीरे -धीरे विकसित होने वाला एक देशी बीमारी है,जो एक कोशीय परजीवी द्वारा होता है।यह परजीवी लिशमेनिया है,जो आमतौर पर संक्रमित मादा सैंड फ्लाई के शरीर में रहते हैं और जब यह मक्खी इंसान को काटती है तो लिशमेनियासिस उसके रक्त में मिल जाता है और वह व्यक्ति कालाजार से ग्रसित हो जाता है :किन्तु इसका लक्षण कई सालों बाद दिखाई देता है।

लक्षण:-प्लीहा का बढ़ जाना,यकृत का बढ़ जाना,नाक एवं मसूड़ों से रक्त स्राव होना,अधिकतर पेचिश,निमोनिया और अतिसार,कृशता,शरीर का रंग काला सा या मटमैला सा होना,कम रक्तचाप,रोगी के टखनों एवं पलकों में सूजन होना ,बेचैनी होना आदि कालाजार के लक्षण हैं।

उपचार:-(1)सुबह खाली पेट मूली के रस में सेंधा नमक मिलकर पीने से तिल्ली (प्लीहा)का बढ़ना बंद हो जाता है और कालाजार की बीमारी का नाश हो जाता है।

             (2)आंवला चूर्ण को शहद में मिलाकर दिन में सुबह -शाम खाने से प्लीहा का बढ़ना रूक जाता है और कालाजार का नाश हो जाता है।

              (3)पीपल का सेवन करने भी कालाजार की बीमारी दूर हो जाती है।

               (4)नौसादर और चूना सामान मात्रा में लेकर रात में ओस में रख दें और सुबह तक वो द्रव्य में परिवर्तित  हो जायेगा।उसे बताशे में डालकर रोजाना खाने से प्लीहा ठीक हो जाती है और कालाजार नष्ट हो  जाता है।

                (5)गिलोय के रस का सुबह -शाम सेवन करने से कालाजार का नाश हो जाता है।

 

 


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