hooping cough

कुक्कुर खांसी :-कुकर खांसी बैसिलस परट्यूसिस नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है ,जो नाक और गला को प्रभावित करता है।यह रोगी के बलगम में होता है,जो खांसने में कफ के साथ छोटे -छोटे कणों के रूप में श्वास नली द्वारा अन्य व्यक्तियों में फ़ैल जाता है। इस बीमारी में श्वसन तंत्र में सूजन हो जाती है और हमेशा खांसी का आक्रमण होता रहता है।यह रोग 6 -7 साल से काम आयु वर्ग के बच्चों में ज्यादातर पाया जाता है;किन्तु यह युवा और वृद्ध व्यक्ति को भी हो सकता है। इस बीमारी में खांसते -खांसते आँखें और चेहरा लाल हो जाता है तथा वामन भी होने लगता है।इस रोग से पीड़ित व्यक्ति साँस लेते या खांसते समय कुत्ते जैसी आवाज करता है ;इसलिए इस रोग को कुक्कुर खांसी ,कुकर कास या काली खांसी भी कहते हैं ।

इस रोग का संक्रमण काल 6 -18 दिन है।इस बीमारी के प्रथम चरण में छींकना,आँखों से पानी आना,नाक बहना,भूख काम होना,ऊर्जा का ह्रास होना और रात के समय खाँसना आदि शामिल है।दूसरे चरण में लगातार खांसते रहना और भोंकने जैसी आवाज आना जब व्यक्ति साँस लेने की कोशिश करे।तीसरे चरण में रोगी में सुधार होने लगता है ,खांसी कम होने लगती है या कभी -कभी होती है।  

उपचार:-(1 )लसोड़े की चटनी ,दशमूल का काढ़ा या घृत तथा चंद्रामृत रस के सेवन से कुकर खांसी ठीक हो जाती है।  

            (2)मुनक्का,पीपर और सोंठ को सामान भाग लेकर कूट पीस कपड़छान कर चूर्ण बनाकर शहद और घी (असमान भाग) चटाने से कुकर 

                खांसी नष्ट हो जाता है।

             (3 )कटेली के फूल और केसर को बारीक कूट पीसकर शहद के साथ चटाने से पुरानी से पुरानी खांसी भी नष्ट हो जाती है।

             (4 )अदरक का रस और शहद मिलकर दिन में दो- तीन बार चटाने से कुकर खांसी का नाश होता है।

             (5 )तीन बादाम रात को पानी में डालकर रख दें ,प्रातः बादाम के छिलके उतार लहसुन की एक कली और मिश्री मिलाकर पीस लें| इस पेस्ट को रोगी को खिलाने से कुकर खांसी का नाश होता है।


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