madness disease

पागलपन:-आज भौतिकवादी युग में लोगों का जीवन भाग -दौड़ से परिपूर्ण है।परिणामस्वरूप लोगों में अवसाद,उलझन,घबराहट,शरीर के कई भागों में दर्द आदि होना बीमारियां हैं;जिन्हें सामान्य मानसिक विकृति(विकार)कहते हैं।इस तरह की बीमारी जिसका कोई शारीरिक कारण नहीं होता है ;किन्तु सामान्य तौर पर इन्हें शारीरिक विकार बोलते हैं।ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लक्षण एक ही तरह के होते हैं ;जैसे अवसाद की बीमारी जो ज्यादा प्रचलित है।अवसाद में नींद नहीं आती है,भूख नहीं लगती है,शरीर का वजन कम हो जाता है,मन दुखी रहता है,नकारात्मक बातें मन में आतीं हैं,किसी से मिलने का मन नहीं करता है,मैं कोई कार्य नहीं कर सकता हूँ इस तरह के विचार मन में आते हैं।यही विचार जब आगे बढ़ जाती है तो मन में आत्महत्या जैसे विचार आने लगते हैं,कुछ लोगों को अँधेरे में डर लगता हैं,कुछ लोगों को लिफ्ट में जाने से डर लगता हैं। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ,उसका इलाज करना चाहिए ;परन्तु हमारे देश भारत में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति हैं ,जिसमें लोग मानसिक रोगों को छिपाने का प्रयत्न करते हैं,मानसिक चिकित्सक के पास जाने से कतराते हैं। इसका नतीजा बहुत ही भयानक और भयंकर होता हैं और बीमारी पागलपन का रूप धारण कर चुकी होती हैं। 

उपचार:-(1 )कपास के दो सेर फूलों को पानी में या गुलाब जल में औटाओ(गरम करना),चौथाई शेष रहने पर छान 

                  कर उसमें आधा सेर गुड़ मिलाकर शरबत बना लें। इसे प्रतिदिन सुबह -शाम सेवन करने से ह्रदय 

                   बलवान हो जाता है,चित्त को प्रसन्न कटरा है और पागलपन दूर हो जाता है। 

 

 

 


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