arteriovenous malformation disease

दिमाग की उभरी नसों की बीमारी : - दिमाग की उभरी हुई नसों का रोग एक अत्यंत गंभीर स्थिति है ,जिसमें दिमाग की नसें एक गुच्छा के रूप में परिवर्तित हो जाती है। दिमाग की उभरी हुई नसों या गुच्छों का रोग जन्मजात होती है और उम्र के बदलाव के साथ - साथ बढ़ने लगती है और दिमाग में दबाव बढ़ने लगती है। फलस्वरूप रोगी के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है यानि व्यवहार सामान्य नहीं रहता है। दिमाग में दबाव बढ़ने से रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है और कभी तो रक्तस्राव भी होने लगता है ,जिसे इंटरवेन्श पद्धति से गले के पास की नस से दिमाग की नसों का रक्तस्राव रोका जाता है ताकि दबाव पर नियंत्रण पाया जा सके। वास्तव में दिमाग की नसों का रक्तस्राव एक जानलेवा स्थिति है ,जिसका उपचार यथाशीघ्र कराना चाहिए। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में दिमाग की नसों या गुच्छों के रोग का उपचार अत्यंत निरापद एवं प्रामाणिक माना जाता है।

लक्षण :- सिरदर्द,देखने में दिक्कत,असामान्य व्यवहार,दिमाग में खून का स्राव होने से नाक से भी खून का आना,उल्टी,चक्कर आना,चेहरे की आकृति में परिवर्तन,आँखों के सामने अँधेरा छाना,बोलने में तुतलापन,अचानक कमजोरी,चेहरे के एक भाग में कमजोरी आना आदि दिमाग की उभरी नसों की बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।  

कारण : - आनुवांशिक,खान - पान की आदतों का सही नहीं होना,मोटापा,पोषक तत्त्वों का अभाव,गलत गतिहीन जीवन शैली,दिमाग की नसों का संकरा हो जाना व्यायाम आदि का नहीं करना आदि दिमाग की उभरी नसों की बीमारी के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) अश्वगंधा पाउडर को दूध के साथ नियमित सेवन करने से दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत आराम मिलता है। 

(2) एक कप दूध में लहसुन की चार - पांच कलियों को उबालकर पीन से दिमाग की उभरी नसों का रोग ठीक हो जाता है। 

(3) प्रतिदिन दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर सेवन करने से दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत फायदा होता है। 

(4) अनार के जूस के नियमित सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत लाभ मिलता है। 

(5) नियमित रूप से बादाम का सेवन भी दिमाग की उभरी नसों की बीमारी में बहुत फायदा होता है। 

(6) अखरोट गिरी के नियमित सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों में बहुत लाभ होता है। 

(7) दूध में दालचीनी,अर्जुन की छाल तुलसी के पत्ते एवं काली मिर्च डालकर चाय पीने से भी दिमाग की उभरी नसों के रोग में अत्यंत लाभ होता है। 

(8) शंखपुष्पी के सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों की बीमारी में अद्भुत लाभ होता है। 

(9) बच चूर्ण को ब्राह्मी के साथ सेवन करने से दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत फायदा होता है। 

(10) जटामांसी के सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों की बीमारी में अत्यंत आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। 

(11) मण्डूकपर्णी के सेवन से दिमाग की उभरी नसों के रोग में अत्यंत लाभ पहुंचाता है। 

आसन,योग एवं प्राणायाम : - अनुलोम - विलोम,कपालभाति,भ्रामरी,भस्त्रिका,शीर्षासन,ॐ का उच्चारण आदि। 

 


  बच्चों के रोग

  पुरुषों के रोग

  स्त्री रोग

  पाचन तंत्र

  त्वचा के रोग

  श्वसन तंत्र के रोग

  ज्वर या बुखार

  मानसिक रोग

  कान,नाक एवं गला रोग

  सिर के रोग

  तंत्रिका रोग

  मोटापा रोग

  बालों के रोग

  जोड़ एवं हड्डी रोग

  रक्त रोग

  मांसपेशियों का रोग

  संक्रामक रोग

  नसों या वेन्स के रोग

  एलर्जी रोग

  मुँह ,दांत के रोग

  मूत्र तंत्र के रोग

  ह्रदय रोग

  आँखों के रोग

  यौन जनित रोग

  गुर्दा रोग

  आँतों के रोग

  लिवर के रोग