peripheral neuropathy disease

परिधीय न्यूरोपैथी रोग : - परिधीय न्यूरोपैथी तंत्रिका तंत्र की एक गंभीर बीमारी है ,जो मानव शरीर में नसों की समस्या को दर्शाता है। ये नसें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र,मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से शेष शरीर को सन्देश पहुँचाते हैं परिधीय न्यूरोपैथी में नसों के क्षतिग्रस्त होने पर तंत्रिका तंत्र शरीर के शेष भागों में सन्देश पहुँचाने में असमर्थ हो जाता है। साथ ही मांसपेशियों की कमजोरी का भी कारण बन जाता है।  वास्तव में परिधीय न्यूरोपैथी शरीर की विभिन्न नसों की शृंखला को भी प्रभावित और क्षतिग्रस्त कर देती है ,जिसका प्रभाव अत्यंत हानिकारक सिद्ध होता है। परिधीय न्यूरोपैथी तंत्रिका तंत्र का एक जटिल विकार है जो तंत्रिका,पैर,मुँह,हाथों,चेहरे,आंतरिक अंगों को तंत्रिका तंत्र से नसों को जोड़ता है। ये तंत्रिकाएं शरीर के इन भागों से सन्देश देने के लिए उत्तरदाई होतें है किन्तु  इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के रीढ़ की हड्डी से मस्तिष्क तक जानकारी ले जाने वाला नसों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में शरीर के तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली बहुत बुरी तरह से बाधित हो जाती है और शरीर में बहुत सारी विसंगतियां आ जाती हैं,जिसका दूरगामी प्रभाव अत्यंत हानिप्रद होता है। 

लक्षण : - अस्थायी रूप से स्तब्ध होना,झुनझुनी,उत्तेजना,मांसपेशियों में कमजोरी एवं चुभन का अनुभव,दर्द महसूस करने में कष्ट ,गर्म एवं ठण्ड का अनुभव न होना आदि परिधीय न्यूरोपैथी रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - शारीरिक आघात,पूर्व चोट में दुहराव,संक्रमण,चयापचय की समस्याएं,विषाक्त पदार्थों एवं दवाओं का प्रयोग,मधुमेह आदि परिधीय न्यूरोपैथी रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) अलसी के बीजों का चूर्ण प्रतिदिन सुबह - शाम सेवन करने से परिधीय न्यूरोपैथी रोग से उत्पन्न समस्याएं दूर हो जाती हैं। 

(2) अश्वगंधा पाउडर के प्रतिदिन दूध के साथ सेवन करने से परिधीय न्यूरोपैथी रोग दूर हो जाता है। 

(3) हल्दी,दारू हल्दी एवं अम्बा हल्दी के चूर्ण को प्रतिदिन ताजे जल के साथ सुबह - शाम सेवन करने से परिधीय न्यूरोपैथी रोग दूर हो जाता है। 

(4) ओमेगा - 3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे - सालमन मछली, फ्लैक्स बीज एसिड के सेवन से भी परिधीय न्यूरोपैथी रोग में बहुत लाभ होता है। 

(5) जई के बीज के प्रतिदिन सुबह - शाम सेवन से भी परिधीय न्यूरोपैथी रोग दूर हो जाता है। 

(6) बादाम,अखरोट गिरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें काली मिर्च एवं बूरा मिलाकर घी के साथ एक चम्मच प्रतिदिन सेवन करने से परिधीय न्यूरोपैथी में बहुत लाभ मिलता है। 

(7) लहसुन की चार - पांच कलियों को पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से भी परिधीय न्यूरोपैथी में बहुत आराम मिलता है। 

(8) ब्राह्मी,शंखपुष्पी के सेवन से भी मस्तिष्क की नसों में ताकत मिलती है और परिधीय न्यूरोपैथी में अत्यंत लाभ मिलता है। 

(9) एलोवेरा जूस के सेवन से भी परिधीय न्यूरोपैथी में बहुत लाभ मिलता है। 

(10) बादाम का हलवा के सेवन से भी परिधीय न्यूरोपैथी में बहुत लाभ होता है। 

(11) अश्वगंधा एवं शतावर चूर्ण के सेवन से भी नर्वस सिस्टम को अत्यंत ताकत मिलती है और परिधीय न्यूरोपैथी रोग में अत्यंत लाभ होता है। 

आसान एवं प्राणायाम : - अनुलोम - विलोम,भ्रामरी,उज्जायी,भस्त्रिका,जलनेति,सूत्रनेति आदि। 


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