nose bleed

 

नकसीर:-यह एक आम बीमारी है नाक के अंदर मौजूद सतह की खून की वाहनियों के फटने के कारण होता है   कभी -कभी रक्त की अधिक मात्रा निकलती है किन्तु यह घातक नहीं होता

कारण :-(1 )गरम और सूखा वातावरण (4 )अधिक ऊंचाई पर जाना

             (2 )नाक में चोट लगना          (5 )कठोर गतिविधि 

             (3 )उच्च रक्त चाप ।।           (6 )नाक को जोर से झाड़ना आदि

उपचार:-(1 )नारियल की गरी को कद्दूकश कर रात कोदूध में भिंगो दें और उसे फ्रिज में रख दें

              सुबह खाली पेट सेवन करने से नकसीर ठीक हो जाता है ।यह अचूक एवं अनुभूत औषधि है।   

            (2 )धनियां और आंवला सामान भाग लेकर शहद में शर्वत बनाकर सुबह -शाम पीने से नकसीर फूटना बंद हो जाता है

 

 


goitre disease

 

कंठमाला या गण्डमाला :-इस बीमारी में गले की ग्रंथियां बढ़ जाती हैं और एक माला के रूप में बन जाती है ;इसलिए इसे कंठमाला कहते हैं ।आयुर्वेद में गण्डमाला या अपची भी कहा जाता है ।इसमें प्रायः कफ एवं मेद की अधिकता होती है इसमें ग्रीवा प्रदेश की लिम्फ ग्रंथि बढ़ जाती है।इसमें  मुख में,गले की भीतर,कान या शिर पर किसी प्रकार शोथ या पाक के कारण ग्रंथियां बढ़ जाती हैं

उपचार:-(1 )कचनार की छाल 50 ग्राम को कूट पीसकर कलईदार बर्तन में 50 ग्राम जल में पकाएं और जब 50 ग्राम शेष रहे तो उतारकर छान लें तथा उसमें 3 -5 ग्राम सोंठ का चूर्ण तथा 10 ग्राम शहद मिलाकर ३० दिनों तक पीने से कंठमाला रोग दूर हो जाता है

()चोबचीनी का चूर्ण 4 -8 ग्राम तक प्रतिदिन do बार शहद के साथ चाटने से कंठमालाको रोग से मुक्ति मिल जाती है

(3 )नीम की छाल के साथ उसके पत्तों को मिलाकार क्वाथ बनाकर पीने से कंठमाला का नाश होता है

(4 )काली जीरी के साथ धतूरे के बीज तथा अफीम घोंट कर जल में गरम कर काढ़ा को गले पर लेप करने से कंठमाला रोग से मुक्ति मिलती है  

 

 

 


thyroid disease

 

थायराइड:- आज वर्तमान समय में अत्यंत भागदौड़,व्यस्त,तनावपूर्ण जीवन शैली के साथ प्रदूषित जल,वायु एवं खान -पान के कारण अनेकों बीमारियों ने अपना पैर पसार रखा है;इनमें बहुत ही प्रचलित एवं भयानक प्रभाव डालने वाला रोग है थायराइड ग्रंथि से उत्पन्न थायराइड;जो अधिकांशतः महिलाओं में पाया जानेवाला रोग है ;किन्तु आज बड़ी संख्या में पुरुष भी इससे अछूते नहीं है।थायराइड ग्रंथि मानव शरीर के गर्दन में सामने की ओर तितली के आकार की अन्तःश्रावी ग्रंथि है जो एक थायरोक्सिन हार्मोन उत्पन्न करती है। यह हार्मोन शरीर में मेटाबोलिज्म की क्रिया को नियंत्रित कर भोजन से प्राप्त अवयव को ऊर्जा में परिवर्तित करता है।थायराइड ग्रंथि ही मेटाबोलिज्म की क्रिया को घटा या बड़ा कर मानव शरीर में अनेकों दिक्क्तें पैदा कर देती है ;परिणामस्वरूप ह्रदय,हमारी मांसपेशियां,हमारी अस्थियों हमारे कोलेस्ट्रॉल पर पूरा प्रभाव डालती है।थायराइड दो प्रकार के होते हैं -                                      

                     (1 ) हायपर थायरॉडिज़्म और

                     (2 )हाइपो थायरॉडिज़्म 

हायपर थायरॉडिज़्म में थायराइड ग्रंथि थायरोक्सिन हार्मोन्स का उत्पादन जरुरत से ज्यादा करने लगता है और हाइपो थायरॉडिज़्म में थायरोक्सिन हार्मोन्स का उत्पादन जरुरत से कम करने लगता है।दोनों ही परिस्थितियों में मानव शरीर पर काफी घातक प्रभाव पड़ता है ;किन्तु पीड़ित व्यक्ति को पता बहुत देर से होती है,जिसका परिणाम 

बहुत ही गंभीर होता है।इसलिए थायराइड को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

लक्षण:-थायराइड में गले में सूजन,रोगी का चेहरा सुजा और मुरझाया हुआ,रात में खर्राटे लेना,अन्य लोगों की अपेक्षा जल्दी थकान का अनुभव करना,पैरों में दर्द,बोलने में दिक्कत होना,बालों का झड़ना,भूख नहीं लगना या ज्यादा लगना,कार्यक्षमता कम हो जाना,कार्य में अरुचि,गर्दन में गांठ,स्मरण शक्ति का ह्रास,भयंकर कब्ज,सुखी त्वचा,रक्त में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना,स्त्रियों में मासिक धर्म का असामान्य,अनियमित एवं रक्त का बहुत ज्यादा स्राव होना आदि थायराइड के मुख्य लक्षण हैं। 

उपचार:-(1)25 ग्राम दालचीनी को पीसकर चूर्ण बनाकर एक चुटकी चूर्ण प्याज के रस में मिलाकर बसी मुँह 21 

                 दिनों तक सेवन करने से थायराइड बिल्कुल सामान्य हो जाता है फिर नहीं बढ़ता है।   इस प्रयोग को 

                 तीन महीने बाद दोबारा दुहराएँ।

             (2)सिर्फ 15 दिनों तक 7 काली मिर्च कुचलकर एक बार में प्रातः प्रतिदिन खाने से थायराइड की समस्या 

                  से निजात मिलती है।२- 3 महीने में 6 बार यही दुहराने से थायराइड जड़ से नष्ट हो जाती है।

              (3) 8 -10 ग्राम आंवले के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से दो -तीन महीने में ही थायराइड दूर हो जाती है।  

               (4)रात में 5 ग्राम धनिया को पानी में भिगो दें और सबेरे उसे उबाल कर पानी को सेवन करने से 

                   थायराइड सामान्य हो जाती है।

 

 


hiccups disease

 

हिचकी:-यह एक अस्थायी समस्या है जो खाने एवं पीने के दौरान होती है।डायफ्रॉम के अकस्मात् चाहते हुए अनैच्छिक रूप से सिकुड़ जाने के कारण वोकल कॉर्ड बंद हो जाती है और श्वसन मार्ग से हम सांस नहीं ले पाते हैं।  ऐसी स्थिति पैदा होने के कारण हिचकी आने लगती है।

कारण:-शीघ्रता से भोजन करना,पर्याप्त चबाने के बजाय सीधे निगलना,भोजन के साथ वायु का पेट में जाना,पेट में 

           गैस बनना, मद्यपान करना,धूम्रपान करना,ठंडी चीजों का सेवन,तनाव आदि हिचकी के लक्षण हैं।

उपचार:(1 )जामुन और तेन्दु के फल फूलों को बारीक़ पीस कर घी और शहद (असमान भाग)मिलाकर चाटने से 

                हिचकी समाप्त होती है।

            (2 )कुटकी के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटने से भी हिचकी नष्ट होती

 

 


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