pneumonia disease

फुफ्फुस प्रदाह रोग:-यह एक अत्यंत खतरनाक एवं गंभीर रोग है,जो फेफड़ों के वायु के थैलियों (अल्विओली या कुपिका )के संक्रमण के कारण होता है।इसमें फेफड़े के थैलियों को द्रव या मवाद से भरकर सूजा देता है,जिससे बलगम या मवाद वाली खांसी,ज्वर,साँस लेने में परेशानी,ठण्ड लगना,जैसी दिक्क्तें महसूस होती है।यह बीमारी शिशुओं,युवाओं एवं साठ साल से अधिक आयु के व्यक्तियों को अधिकांशतः होता है।फुफ्फुस प्रदाह रोग या निमोनिया विशेष तौर पर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों के लिए अधिक हानिप्रद सिद्ध होता है।ज्यादातर किस्म के निमोनिया संक्रामक होने के कारण वायरल एवं वैक्टेरियल निमोनिया छींकने या खांसने से अन्य व्यक्तियों में भी फ़ैल जाता है ;किन्तु कवक निमोनिया इस प्रकार से नहीं फैलता है।

लक्षण:- बलगम वाली खांसी,पसीना युक्त कंपकंपी वाली बुखार,साँस लेने में परेशानी एवं तेजी से साँस के कारण, लेना,बेचैनी,सीन में दर्द,भूख काम लगना,खांसी में खून आना,मितली,उल्टी आदि फुफ्फुस प्रदाह या निमोनिया के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण:-विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं के संक्रमण के कारण,वैक्टीरिया या वायरस के कारण,इन्फ्लुएंजा ए,रेस्पिरेटरी सिनसिटियल वायरस के कारण,कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण,एड्स आदि फुफ्फुस प्रदाह के प्रमुख कारण हैं।

उपचार:- (1) बेलगिरी,अजवाइन,भारंगी,पुष्पकरमूल,पीपल,सोंठ और दशमूल सबको मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से फुफ्फुस प्रदाह या 

                 निमोनिया की बीमारी दूर हो जाती है।

             (२) मुलहठी 10 ग्राम,तुलसी के पत्ते 20 ग्राम,बहेड़े की छाल 3 ग्राम,पोहकर की जड़ 3 ग्राम,अडूसा के पत्ते 10 ,और मिश्री एक तोला 

                  सबको कूट पीस कर चूर्ण को आधा लीटर जल में डालकर काढ़ा बनाकर पीने से फुफ्फुस प्रदाह की बीमारी दूर हो जाती है।

             (3) इलायची और लौंग एक पाव पानी में में डालकर काढ़ बना कर पीने से यह बीमारी दूर हो जाती है।

             (4) गिलोय की डंडी,तुलसी के पत्ते,लौंग,छोटी पीपल सबको लेकर काढ़ा बनाकर पीने से फुफ्फुस प्रदाह की बीमारी दूर हो जाती है।

             (5) गाजर,पालक एवं चुकुन्दर का रस पीने से भी फुफ्फुस या निमोनिया की बीमारी दूर हो जाती है।


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