chronic fever

जीर्ण ज्वर:- मनुष्य के शरीर का एक सामान्यतापक्रम होता है।जब सामान्य से ताप बढे तो ज्वर होना कहा जाता है।साधारण ज्वर जब चिकित्सा के आभाव के कारण दीर्घ कल तक बना रहता है तो वह जीर्ण ज्वर में परिवर्तित हो जाता है।यह ज्वर जब रोगी को 14 दिनों से अधिक बना रहता है और उतरता नहीं है तो इसे जीर्ण ज्वर कहते हैं।यह बुखार कभी धीमा और कभी तेज हो जाती है।इसे पुराण बुखार के नाम से भी जाना जाता है।

लक्षण:-हल्का बुखार,अरुचि,सिरदर्द,दुर्बलता,शरीर में पीलापन,आँखों में पीलापन,रक्त में कमी,कब्ज,पतले दस्त आदि जीर्ण ज्वर के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण:-साधारण का इलाज न करवाना,अपथ्य का सेवन,रोग से अनजान के कारण आहार-विहार आदि जीर्ण ज्वर के कारण हैं।

उपचार:-(1) नीम वृक्ष की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें धनिया और सोंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से जीर्ण ज्वर दूर हो जाता है।

            (२) नीम के पत्ते 100 ग्राम,अजवाइन 50, काली सोंठ 25 ग्राम, मिर्च,पीपल,त्रिफला,तीनो प्रकार के नमक 20 -20 ग्राम सबको लेकर 

                 कूट पीस कर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन एक चम्मच ताजे जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से जीर्ण ज्वर का नाश हो जाता है।

            (3) बकाइन के कच्चे ताजे फलों से बीज निकाल कर कूट कर रस निकल लें और बराबर मात्रा में गिलोय का रस मिलाकर तथा 

                चौथाई भाग में देशी अजवाइन का चूर्ण मिलाकर झड़बेरी के समान गोली बनाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से जीर्ण ज्वर 

                दूर हो जाता है।

            (4) बड़ी इलायची के बीज,बेल की जड़ की छाल,पुनर्वा की जड़ प्रत्येक 10 -10 ग्राम लेकर चूर्ण बना कर सुबह -शाम सेवन करने से 

                 जीर्ण ज्वर नष्ट हो जाता है।

            (5) पीपल,पीपलामूल,धनिया,कला जीरा,कला नमक,सोंठ,काली मिर्च,दालचीनी सबको सामान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन एक चम्मच सुबह-शाम खाने से जीर्ण ज्वर


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