Pelvic inflammatory disease

श्रोणि सूजन बीमारी:- भारतीय समाज में सेक्स सम्बन्धी चर्चा या इसकी शिक्षा के बारें में ज्ञान देना अनुचित माना जाता है,जिसके कारण इस सम्बन्ध में युवतियों या महिलाओं में ज्ञान का आभाव है।इसके कारण स्त्रियों में यौन रोगों का होना एक बहुत बड़ी समस्या है।जागरूकता या ज्ञान के आभाव के कारण महिलाओं में श्रोणि सूजन या जलन की बीमारी का होना एक गंभीर कारण है।यह बीमारी महिलाओं के प्रजनन अंगों में होने वाला संक्रमण है ,जो यौन संचारित बैक्टीरिया महिलाओं की योनि से गर्भाशय,फैलोपियन ट्यूव या अंडाशय तक फ़ैल जाता है।इससे ग्रसित महिलाओं को लक्षण या संकेत का अनुमान नहीं होता ,इसलिए उन्हें उपचार की जरुरत महसूस नहीं होती।नतीजन वे गर्भवती नहीं हो पाती हैं और उन्हें पेल्विस (पेट के निचले भाग में )दर्द रहने लगता है।यह बीमारी अधिकतर 25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को होने वाली बीमारी है। कामेन्द्रियों में लिप्त महिलाएं जिसकी उम्र 25 से कम होती हैं ,उनको 25 से अधिक उम्र के वालों से ज्यादा खतरा होता है;क्योंकि इस उम्र की लड़कियों और युवतियों की ग्रीवा (सर्विक्स )पूर्णतः परिपक़्व नहीं होती हैं तथा वे यौन संचारित बीमारी के लिए अति संवेदनशील होती हैं जो श्रोणि जलन बीमारी का कारण बनती है।

लक्षण:- पेट के निचले भाग में दर्द,बदबूयुक्त स्राव,सम्भोग के समय दर्द का अनुभव,पेशाब करते समय 

           दर्द,मासिक धर्म के दौरान अनियमित रक्तस्राव होना आदि श्रोणि जलन या सूजन के मुख्य लक्षण हैं। 

कारण:-(1 )25 वर्ष से कम उम्र की महिला का यौन रूप से सक्रिय होना।

           (2)कई पुरुषों के साथ यौन सम्बन्ध बनाना।

            (3)ऐसे पुरुष से यौन सम्बन्ध बनाना जिसके एक से अधिक सेक्स पार्टनर हों।

            (4)असुरक्षित सेक्स करना।

            (5)नियमित रूप से योनि को रासायनिक द्रव से धोना आदि।

उपचार:- (1)दो सौ ग्राम तुलसी के बीजों को कूट पीस कर उसमें पाँच सौ ग्राम पिसी मिश्री मिलाकर गाय के दूध 

                  के साथ सुबह -शाम सेवन करने से श्रोणि सूजन की बीमारी नष्ट हो जाती है।

              (2)पीपल की दाढ़ी (जटाएं) एक ग्राम और पीपल के फल तीन ग्राम दोनों को पीसकर सुबह -शाम 

                   बछड़े वाली गाय के दूध के साथ सेवन करने से श्रोणि सूजन की बीमारी का समूल नाश हो जाता है। 

                   यह अनुभूत एवं अचूक औषधि है।

               (4)गूलर के फलों का चूर्ण को सुबह -शाम ठण्डे जल के साथ सेवन करने से श्रोणि सूजन की बीमारी 

                   का नाश हो जाता है।

               (5)बरगद के दूध को बताशे में मिलाकर सुबह -शाम सेवन करने से श्रोणि सूजन की बीमारी का नाश 

                   हो जाता है।

 

 


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