bed wetting disease

बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना :-बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना एक आम समस्या है।रात्रि में बच्चे सोते समय गहरी नींद में,होने,भयानक डरावना सपना देखने,मानसिक स्ट्रेस,मूत्राशय की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाने के कारण,मूत्राशय का आकार छोटा होने की वजह से बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं।यह समस्या लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में ज्यादा पाई जाती है जो बढ़ती उम्र के साथ अपने -आप ठीक हो जाती है।कभी -कभी ठीक नहीं होना एक गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकता है।

लक्षण :- पेशाब के दौरान दर्द,बार -बार पेशाब आना,बदबूदार पेशाब,सोते हुए पेशाब करना आदि बिस्तर पर पेशाब करने के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- मूत्राशय का छोटा होना,किडनी या मूत्राशय में इन्फेक्शन होना,पेशाब ज्यादा देर तक न रोक पाना,आनुवंशिक कारण,दवाओं का प्रभाव,बार -बार बुखार,कम खाना,उल्टी,ज्यादा सोना,पेट में कीड़ा होना,कब्ज,डर या तनाव,कम उम्र का होना,ब्लैडर की कमजोरी,मूत्र मार्ग में संक्रमण,हार्मोन का असंतुलन,इमोशनल एवं मेन्टल स्ट्रेस,यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन,किसी बीमारी के कारण,गहरी नींद में होना आदि बिस्तर पर पेशाब करने के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) थोड़ा सा गुड़ एवं तिल दोनों को मिलाकर बच्चों को खिलाने से बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना ठीक हो जाता है।

              (2) पांच -छह मुनक्का बीज निकालकर प्रतिदिन बच्चों को खिलाने से बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है।

              (3) एक कटोरी में पानी डालकर उसमें थोड़े से किशमिश डाल दें और सुबह खाली पेट बच्चों को खिलाने से बिस्तर पर पेशाब 

                    करना ठीक हो जाता है।

              (4) गुड़ के साथ एक चम्मच अजवाइन चूर्ण को मिलाकर प्रतिदिन बच्चों को खिलाने से बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है।

              (5) जामुन की गुठलियों को दूध में सुखाकर चूर्ण की तरह पीस लें और रोजाना एक चम्मच की मात्रा पानी के साथ खिलाने से बच्चों 

                    का बिस्तर पर पेशाब करना ठीक हो जाता है।

                (6) छुहारे को दूध में उबालकर प्रतिदिन खिलाने से बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है।

                (7) धनिये के बीजों को भूरा होने तक तवे पर भूनें और उसमें एक चम्मच अनार के फूल,तिल एवं बबूल की गोंद मिलाकर मिश्रण 

                     बना कर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सोते समय आधा -एक चम्मच खिलाने से बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना दूर हो 

                     जाता है।


abdominal gas

पेट में गैस:- बच्चों के पेट में गैस बनना एक आम समस्या है।बच्चों की पाचन शक्ति ज्यादा मजबूत नहीं होती है और वे दूध पीते समय ज्यादा दूध पी लेते हैं और खाना खाते समय ज्यादा खाना खा लेते हैं।फलस्वरूप भोजन ठीक तरह से हजम नहीं होने से उल्टी एवं दस्त की स्थिति बन जाती है।पेट में गैस बन जाने से पेट में दर्द ,मरोड़ आदि समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

लक्षण:- पेट में गैस,पेट का फुला होना,मंदाग्नि,अरुचि,कब्ज,दर्द,मरोड़,चिड़चिड़ा होना,दूध पीना छोड़ देना,साँस लेने में परेशानी,उल्टी आदि प्रमुख लक्षण हैं।

उपचार:- (1) अदरक का रस एक चम्मच,नीम्बू का रस आधा चम्मच और शहद को डालकर खिलाने से पेट की गैस समाप्त हो जाती है।

             (2) मूली और कला नमक मिलाकर चटनी बनाकर खाने से गैस,अरुचि,भोजन का न पचना आदि ठीक हो जाता है।

             (3) बेल के पत्ते 4 और हरसिंगार की पत्तियां 4 लेकर एक कप पानी में डालकर उबालें और उसमें कला नमक मिलाकर पीने से पेट की गैस तत्क्षण दूर हो जाती है।

             (4) जीरा,बच.सोंठ और भुनी हुई हींग को पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें और चार ग्राम की मात्रा                       गुनगुने जल के साथ सेवन से पेट की गैस में बहुत आराम हो जाता है।

            (5) अजवाइन और काला नमक को छाछ के साथ मिलाकर सेवन करने से पेट की गैस में आराम                    होता है। 


mouth-sores

मुख व्रण या मुँह का छाला रोग:-बच्चों में मुख व्रण या छाला रोग बहुत ही कष्टप्रदायक रोग है।यह कब्ज और पेट की गर्मी के कारण होते हैं। इसमें मुँह के अंदर होठों,जीभ या मसूड़ों पर सफ़ेद रंग का छोटे आकार का फोड़ा हो जाता है,जो चारों ओर लालिमा युक्त जलन पैदा करनेवाला होता है।बच्चा अच्छी तरह से न तो बोल पाता है और न ही खा पाता है ,जो बच्चों के लिए बहुत ही दर्दनाक और परेशानियों वाला होता है।

लक्षण:- मुँह में दर्द,जलन होना,बोलने,खाने -पीने में परेशानी,दाँतों को साफ करते समय फोड़े से खून आना,भूख कम हो जाना आदि मुख व्रण के प्रमुख लक्षण हैं।

उपचार:- (1) बच्चों को दूध पिलाते समय पहले स्तन के निप्पल को अच्छी प्रकार गर्म जल से धोकर एवं उसपर 

                  शहद लगाकर स्तनपान करने से मुख व्रण या छाले बहुत जल्द ठीक हो जाते हैं।

             (2) एलोवेरा जेल को मुख के छाले पर लगाने से मुख व्रण ठीक हो जाते हैं।

             (3) तुसी के पत्तों को पीस कर लगाने से या खाने से भी मुख के छाले ठीक हो जाते हैं।

             (4) दही में शहद मिलकर खिलाने से मुँह के छाले दूर होते हैं।

             (5) छाछ के सेवन से भी मुँह के छाले ठीक हो जाते है ,क्योंकि इसमें लैक्टिक एसिड होता है जो 

                 जीवाणुओं को रोकने में मदद करता है।

             (6) मुँह के छाले पर देशी घी लगाने से भी बहुत जल्द आराम होता है।

             (7)शहद और हल्दी मिलाकरलगाने से मुँह के छाले जल्द ठीक हो जाते हैं।

             (8) मुँह के छाले पर नारियल तेल लगाने और नारियल के दूध से गरारे करने से छाले बहुत जल्द आराम 

                  हो जाते हैं।


child weeping

बच्चों का बहुत रोना :-सभी शिशु रोते हैं ,यह बिलकुल सामान्य बात है।अधिकांश शिशु प्रत्येक दिन कुल एक घंटे से लेकर तीन घंटे तक के समय के लिए रोते हैं ;किन्तु जब शिशु ज्यादा रोये और चुप नहीं हो तो यह समझना चाहिए कि बच्चों को कुछ परेशानी है,शिशु तो बता नहीं सकता।वैसी स्थिति में जिस अंग को बालक बार -बार स्पर्श करे अथवा जिस स्थान को दबाने से बच्चा ज्यादा रोये ,वही स्थान पीड़ा का हो सकता है ,यह समझना चाहिए और उसका समुचित उपचार करना चाहिए। 

उपचार :-पीपर और    त्रिफला का चूर्ण घी तथा शहद (असमान भाग ) के साथ चटाने से बच्चों का रोना और चौंकना आराम हो जाता है । 


sukha rog

सूखा रोग :-सूखा रोग (रिकेट्स )अस्थियों का रोग है ,जो अधिकांशतः बच्चों में पाया जाता है।इस बीमारी में बच्चों में हड्डियाँ नरम और कमजोर हो जाती हैं।परिणामस्वरूप अस्थिविकार के कारन पैरों में टेढ़ापन और मेरुदंड में मोड़ आ जाता है।

लक्षण :-विटामिन डी कि कमी ,दाँतों कि समस्या ,कंकाल विकृति ,अस्थि भंगुरता ,विकास में बाधा,हड्डियों का दर्द ,पेशीय कमजोरी आदि सूखा रोग के प्रमुख लक्षण हैं

कारण:-सूखा रोग लम्बे समय तक विटामिन डी की कमी के कारण होता है।कैल्सियम एवं फास्फोरस की कमी भी सूखा रोग का कारण है। 

उपचार :-बिदारिकाण्ड ,गेहूँ ,और जौ का आटा घी में मिलाकर खिलाना चाहिए और दूध -मिश्री या शहद -दूध पिलाना चाहिए ।   


pasli harfa

पसली (पांजारा ),डब्बा और हरफा:-लक्षण :-यह छोटे बच्चों को प्रायः हो जाता है ।इसमें रोगी को ज्वर और खांसी होती है ,सांस लेने में कष्ट होता है और पसली में दर्द होता है ।

उपचार :-(१) जब बालक का पाखाना और पेशाब बंद जाये ,बुखार तेज हो और सांस चले तो गोंद बबूलऔर मुसब्बर समान भाग घी कुवार के रस में मिलाकर पेट पर गुनगुना लेप करना चाहिए ।   

(२) कबीला -८ भाग और हींग -१ भाग दोनोंको बारीक पीसकर दही के तोड़ के साथ गोली मिर्च के समान बना कर गर्म जल के साथ देने से रोग नष्ट होता है ।


afra vayu

अफरा एवं वायु रोग :- उपचार:- बच्चों के अफरा एवं वायु रोग में सेंधा नमक ,सोंठ ,हींग और भारंगी का बारीक चूर्ण घी के साथ चाटने से पेट का फूलना और दर्द का शमन होता है ।  


mahapadmak

महापद्मक :-लक्षण :-बच्चों में यह रोग मूत्राशय एवं मस्तक में होता है।यह एक प्रकार का बिसर्प रोग है ।इसमें कभी लाल कभी खर्दरी काँटोवाला 

कोई नीला और लाल मिश्रित बुझे हुए अंगारे के समान फुंसियां होतीं हैं ।यह अत्यंत शीघ्रता से फैलता है ।रोगी की संज्ञा नष्ट हो जाती है और बच्चा बैचैन हो जाता है ।

लक्षण:- बच्चों का लगातार रोना,शरीर व चेहरे पर छोटे -छोटे दाने,बच्चे की साँस असामान्य होना ,बच्चों का दूध न पीना आदि महापद्मक बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। 

उपचार :-(१) बड़,गूलर ,पीपर ,पाकड़ ,वेंत ,जामुन ,मुलेठी ,मजीठ ,चन्दन खाश और पद्माख को बारीक पीसकर लेप करने से रोग नष्ट हो जाता है 


Gudaapaak

गुदापाक:-लक्षण :-गुदा का पकना, श्राव होना,जिससे ज्वर आदि का होना बच्चों की आम बीमारी है । 

उपचार :-(1)शंख सफ़ेद,सुरमा और मुलेठी को बारीक पीसकर लेप बनाकर लगाने से गुदापाक बहुत शीघ्रता से नष्ट हो जाता है ।

(२)काली मिर्च को नवनीत यानि नैनू के साथ खिलाने से बच्चों का गुदापाक नष्ट हो जाता है ।


dantodabhedak

दन्तोदभेदक:-लक्षण :-बालक के दाँत निकलते समय के सभी रोग इसके अंतर्गत आते हैं ।  यथा :-ज्वर,दस्त  ,खांसी,मस्तक पीड़ा,नेत्र पीड़ा इत्यादि । 

उपचार :-

(१)चूना और शहद मिलाकर बालक के दाँतों के मसूड़ों पर मलने से दाँत शीघ्रता से आते हैं और दाँतों के निकल आने से और बीमारियों   से राहत       

   मिल जाती है ।                    

  (२)बच्चों के गले में सीप लटकाने से भी दाँत शीघ्रता से आते हैं ।


  बच्चों के रोग

  पुरुषों के रोग

  स्त्री रोग

  पाचन तंत्र

  त्वचा के रोग

  श्वसन तंत्र के रोग

  ज्वर या बुखार

  मानसिक रोग

  कान,नाक एवं गला रोग

  तंत्रिका रोग

  मोटापा रोग

  बालों के रोग

  जोड़ एवं हड्डी रोग

  रक्त रोग

  ह्रदय रोग

  आँखों के रोग

  यौन जनित रोग

  गुर्दा रोग

  आँतों के रोग

  लिवर के रोग