kidney failure disease

गुर्दा फैल्योर रोग :- गुर्दा या किडनी फैल्योर एक अत्यंत घातक रोग है,जिसमें किडनी या गुर्दा अपना कार्य सामान्य रूप से नहीं कर पाता है।एक ऐसी अवस्था जिसमें गुर्दों की अपशिष्ट पदार्थों को निकालने और द्रवों को संतुलित करने की क्षमता में कमी आ जाती है। वास्तव में किडनी का मुख्य कार्य खून का शुद्धीकरण करना है।जब भलीभांति रूप से कार्य नहीं कर पाता है तब शरीर से विजातीय तत्त्व नहीं निकल पाता है और खून में क्रिएटिन एवं यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है।रक्त की जाँच में गुर्दा के ख़राब होने का संकेत नहीं मिलता है; किन्तु जब गुर्दा 50 प्रतिशत से अधिक ख़राब हो जाता है,तब रक्त में क्रिएटिन एवं यूरिया की मात्रा परिलक्षित होती है।आधुनिक चिकित्सा पद्धति में गुर्दा फैल्योर की कोई भी औषधि नहीं है ;किन्तु आयुर्वेद में ठीक किया जा सकता है।

गुर्दा या किडनी फैल्योर की कई अवस्थाएं होतीं हैं ---(1) क्रोनिक किडनी रोग :- इसमें लम्बे समय से चल रहा गुर्दा रोग,जिसमें कार्य करना बंद कर देता है।

(2) एक्यूट किडनी इंजरी :- ऐसी स्थिति,जिसमें गुर्दे अचानक रक्त से बेकार एवं हानिकारक तत्त्वों को छानना बंद कर देते हैं।

(3) नेफ्रोटिक सिंड्रोम :- यह एक आम किडनी की बीमारी हैं,जो लम्बे समय तक चलने वाला होता हैं ।

लक्षण :- उलटी होना,भूख में कमी,थकावट,कमजोरी,अनिद्रा,पेशाब कम होना,हिचकी आना,मांसपेशियों में खिंचाव,पैरों एवं टखने में सूजन,लगातार खुजली होना,दिमाग ठीक से काम न करना,सीने में दर्द होना,उच्च रक्तचाप अनियंत्रित होना आदि गुर्दा फैल्योर के प्रमुख लक्षण हैं ।

कार :- ऑटो इम्यून रोग के कारण,कैंसर,मधुमेह,दवा का कुप्रभाव,आनुवंशिक कारण,कोलेस्ट्रॉल का बढ़ जाना,नेफ्रॉन (छनन यूनिट ) में सूजन,गर्भावस्था,डिहाइड्रेशन,किडनी में संक्रमण,आघात,शरीर में पानी की कमी,पेशाब का वेग रोकना आदि गुर्दा फैल्योर के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) पुनर्नवा पौधे के रस का प्रतिदिन सुबह -शाम सेवन करने से किडनी फैल्योर ठीक हो जाता हैं और सुचारु रूप से कार्य करने 

                    लगता हैं।

              (2) गिलोय स्वरस एवं गिलोय सत्व के प्रतिदिन सेवन करने से किडनी फैल्योर ठीक हो जाता हैं।

              (3) एलोवेरा जूस के प्रतिदिन सेवन से भी किडनी फैल्योर ठीक हो जाता हैं।

              (4) ज्वारे एवं गिलोय स्वरस मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से किडनी फैल्योर ठीक हो जाता हैं।

              (5) मौसमी,संतरा,किन्नू ,कीवी,खरबूजा,आंवला एवं पपीते के प्रतिदिन सेवन करने से किडनी फैल्योर ठीक हो जाता हैं।

              (6) गाजर ,तुरई ,टिंडा ,ककड़ी ,अंगूर ,तरबूज ,अनन्नास ,नारियल पानी व सेव के रस के प्रतिदिन सेवन करने से किडनी फैल्योर 

                    ठीक हो जाता हैं ।


kidney disease

मधुमेही नेफ्रोपैथी:-मधुमेही नेफ्रोपैथी गुर्दे की एक प्रगतिशील बीमारी है,जो गुर्दे की विफलता,अपशिष्ट पदार्थों को छानने की क्षमता के अभाव को उत्पन्न या जन्म देती है। शुरुआत में ग्लोमेरुलस का मोटा होना इसका लक्षण है,जिसके कारण मूत्र के द्वारा गुर्दे से अधिक मात्रा में सीरम एब्ल्यूमिन (प्लाज्मा प्रोटीन )का निकलना शुरू हो जाता है।यह गुर्दे की ग्लोमेरुली की कोशिकाओं में वाहिक रुग्णता की वजह से होती है।वास्तव में यह दीर्घकालिक मधुमेह के कारण उत्पन्न होनेवाली बीमारी है,जो मरीजों को बड़ी संख्या में डायलिसिस की अवस्था तक लाने वाली स्थिति पैदा कर देती है।

लक्षण:-सुबह के समय आँखों के पास सूजन,बाद में पूरे शरीर में सूजन होना,पैरों में सूजन,शरीर में तरल बढ़ने से वजन का बढ़ जाना,मूत्र में अधिक झाग होना,भूख में कमी,जी मिचलाना एवं उल्टी होना,बीमार महसूस करना,थकान का अनुभव करना ,सिरदर्द होना,शरीर के कई भागों में खुजली होना,लगातार हिचकी होना,रक्तचाप का बढ़ जाना आदि मधुमेही नेफ्रोपैथी के प्रमुख लक्षण हैं।

उपचार:-(1)नागरमोथा की जड़,हरीतकी,लोध्रा,कायफल की छाल सबको समान भाग लेकर एक लीटर जल में उबालें ,जब आधा रह जाए तो छान कर सुबह -शाम एक चम्मच पीनेसे मधुमेही नेफ्रोपैथी से उत्पन्न विकृति नष्ट हो जाती है और गुर्दा सही तरह से काम करने लगता है। 

             (2)नीम की अंतर छाल,जामुन की छाल,आम की छाल,बबूल की छाल,अमरुद की छाल सबको समान भाग लेकर मिट्टी के पात्र में एक लीटर जल में डालकर उबालें,जब आधा रह जाए तो छानकर सुबह - शाम एक-एक चम्मच सेवन करने से मधुमेही नेफ्रोपैथी से उत्पन्न विकृति का नाश हो जाता है।


uremia disease

रक्त में यूरिया बढ़ना :- मानव शरीर में किडनी हमारे शारीरिक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है;किन्तु जब किडनी सुचारु रूप से कार्य नहीं करता है तो रक्त में यूरिया की मात्रा बाद जाती है।मानव शरीर के लिए यह एक आपातकालीन समस्या है।यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किये जाने पर गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है और किडनी पूर्णरूपेण कार्य करने में असमर्थ हो जाता है।अंततः मनुष्य की जीवनलीला समाप्त हो जाती है।वास्तव में यूरिया किडनी खराबी का एक साइड प्रभाव है,जिसका उपचार आवश्यक है।

लक्षण :- कमजोरी,जल्द थकान,मितली एवं उल्टी,भूख न लगना,भ्रम,दिल की धड़कन अनियमित,पैरों एवं टखनों के आसपास सूजन,बार -बार पेशाब आना,सुखी खुजलीदार त्वचा आदि रक्त में यूरिया बाद जाने के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- मधुमेह,उच्च रक्तचाप,गंभीर चोट,संक्रमण,प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि,ग्लोमेरुली में सूजन,कैंसर,किडनी रोग,किडनी में पथरी,धूम्रपान,शराब का सेवन,काम पानी पीना आदि रक्त में यूरिया बाद जाने के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) पुनर्नवा के पत्तों का रस प्रतिदिन दो -दो चम्मच सुबह- शाम सेवन करने से किडनी ठीक तरह से काम करने लगता है और रक्त 

                    में यूरिया नियंत्रित हो जाती है।

              (2) पुनर्नवा के पत्तों का शाक के रूप में सेवन करने से किडनी सुचारु रूप से कार्य करने लगता है और रक्त में यूरिया की समस्या 

                    दूर हो जाती है।

              (3) खीरा,लौकी,पत्तागोभी एवं गाजर का जूस प्रतिदिन सुबह -शाम पीने से किडनी अपना कार्य सुचारु रूप से करने लगता है और 

                    रक्त में यूरिया की मात्रा नियंत्रित हो जाती है।

              (4) पीपल की छाल 10 ग्राम,नीम की छाल 10 ग्राम तीन गिलास पानी में डालकर उबालें और आधा रह जाने पर छानकर सुबह 

                    -दोपहर -शाम पीने से किडनी सही तरह काम करने लगता है और रक्त में यूरिया की मात्रा नियंत्रित हो जाती  है।

              (5) कासनी के पौधे की दो -दो पत्तियों को प्रतिदिन सुबह -शाम चबाने से किडनी स्वस्थ हो जाती है और रक्त में यूरिया की मात्रा 

                   नियंत्रित हो जाती है। 


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