acute encephalitis syndrome disease

चमकी बुखार या एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम रोग :- चमकी बुखार एक रहस्यमय,संक्रामक एवं खतरनाक बीमारी के रूप में विख्यात है,जो मस्तिष्क की तंत्रिका तंत्र की बीमारी है।इस बीमारी में वायरस के संक्रमण हो जाने से मस्तिष्क के नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो जाता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन एवं अन्य समस्या उत्पन्न हो जाती है ।फलस्वरूप शरीर के अंग कार्य करने में असमर्थ हो जाता है ।यह वास्तव में अत्यधिक गर्मी एवं नमीयुक्त मौसम में शरीर में पानी की कमी के कारण खून में शुगर एवं सोडियम की कमी हो जाने की वजह से होता है। इसे दिमागी बुखार के नाम से भी जाना जाता है ।

भारत में प्रत्येक साल मई और जून के महीने में विशेषकर बिहार प्रान्त के अलग -अलग क्षेत्रों में 1 से 15 साल की उम्र की बच्चे इस बीमारी से अत्यधिक प्रभावित होकर अपना जीवन खो देते हैं।इस बीमारी में शरीर की प्रमुख नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र प्रभावित होती है ।अत्यधिक गर्मी एवं नमीयुक्त मौसम में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम की फैलने की रफ़्तार अत्यधिक बढ़ जाती है ;क्योंकि गर्मियों में तेज धूप ,शरीर में पानी की कमी हो जाने एवं समय पर उचित उपचार न मिल पाने की वजह से जानलेवा साबित हो जाती है ।वास्तव में मानव मस्तिष्क में असंख्य कोशिकाएं एवं तंत्रिकाएं होती हैं ,जिनके सहारे शरीर की अंग कार्य करते हैं ।किन्तु जब इन कोशिकाओं में सूजन या अन्य दिक्क्तें आ जाती हैं तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं ।

लक्षण :- अत्यधिक पसीना आना,तेज बुखार,शरीर में पानी की कमी,शरीर में ऐठन,डिहाइड्रेशन,लो ब्लड प्रेशर,सिरदर्द,थकान,बेहोशी,जबड़े और दानत कड़े हो जाना,लकवा,मिर्गी,भूख में कमी आदि चमकी बुखार की प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- वाइरस,वैक्टीरिया,फंगस,प्रोटोजोआ ,अत्यधिक गर्मी,शरीर में पानी की कमी,खून में शुगर एवं सोडियम की कमी,खली पेट लीची खाकर पानी पीना,मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन आदि चमकी बुखार की मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1)  चीनी ,नमक का घोल ,छाछ,शिकंजी लगातार एक -एक घंटे पर पिलाने से चमकी बुखार में बहुत राहत मिलती है और प्राण 

                     रक्षा हो जाती है ।

              (2) नीम्बू और पानी में थोड़ा सा नामक एवं चीनी मिलाकर प्रति घंटे पिलाने से चमकी बुखार से शरीर में होने वाली पानी की कमी को रोककर जान की रक्षा होती है ।

              (3) एलोवेरा जूस प्रति घंटे पिलाने से भी चमकी बुखार दूर हो जाती है।


              (4) गिलोय स्वरस प्रतिदिन तीन बार पिलाने से चमकी बुखार से मुक्ति मिलती है।

              (5) मठ्ठा ,लस्सी और बेल का शरबत पिलाने से भी चमकी बुखार में राहत मिलती है ।

                    (6) नारियल पानी के प्रतिदिन सुबह -शाम सेवन से भी चमकी या एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम रोग से बचाव हो जाता है ।


irritable bowel syndrome

चिड़चिड़ा (क्षोभी)आंत्र विकार:-  एक आँतों का रोग है,जो जठरांत्र पथ और मस्तिष्क के मध्य में सम्पर्क का एक विकार है।इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होकर चिरकालिक दर्द,थकान आदि का कारण बनती हैं।इस बीमारी को स्पैस्टिक कोलन,इर्रिटेबल कोलन,म्यूकस कोइलटिस जैसे नामों से भी जाना जाता है।यह आँतों को क्षतिग्रस्त तो नहीं करता;परन्तु ख़राब होने का संकेत अवश्य देने लगता है,जिसे नजरअंदाज करने पर व्यक्ति को शारीरिक दुर्वलता एवं तकलीफें महसूस होने लगती हैं तथा पेट में  दर्द,बेचैनी,मल त्याग करने में परेशानी आदि होती हैं।यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाईं जाती हैं।

लक्षण:-पेट में दर्द,बेचैनी के साथ लगातार दस्त या कब्ज,हाथ -पैरों में सूजन,आलस्य,चिड़चिड़ापन,पेट का साफ न होना यानि मल की अधूरी निकासी,थकान,सिरदर्द,पीठ में दर्द,मनोरोग के लक्षण जैसे -अवसाद एवं चिंता से सबंधित लक्षणों का पाया जाना,आँतों की आदतों में परिवर्तन के कारण अपक्व मलों का होना आदि क्षोभी आंत्र विकार के सामान्य लक्षण हैं |

उपचार:-(1)नागरमोथा,सोंठ,अतीश,गिलोय सबको समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर छान लें और बीस-तीस मिलीलीटर सुबह खली पेट पीने से क्षोभी आंत्र विकार का नाश हो जाता है।     

           (2) हरीतकी,शुंठी,पिप्पली,चित्रक समान भाग लेकर चूर्ण बनाकर सुबह -शाम तीन से छह ग्राम छाछ के साथ सेवन से क्षोभी आंत्र विकार नष्ट हो जाता है।

           (3)दालचीनी,सोंठ,जीरा समान भाग लेकर चूर्ण बनाकर दो -तीन ग्राम की मात्रा शहद के साथ खाने से क्षोभी आंत्र विकार का नाश हो जाता है।

          (4)तीन ग्राम इसबगोल गुनगुने जल के साथ सोते समय खाने से यह बीमारी दूर हो जाती है।

          (5)एक गिलास जल में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण भिंगों दे और प्रातः खली पेट पीने से क्षोभी आंत्र विकारका नाश हो जाता है।

          (6) त्रिकूट चूर्ण के सेवन करने से आँतों में जमे हुए विषाक्त मल के निकल जाने से क्षोभी आंत्र विकारका नाश हो जाता है।


low sperm count

वीर्य में शुक्राणुओं की कमी :- वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होने पर व्यक्ति संतान पैदा करने में असमर्थ रहता है ,जिससे वह सम्मानजनक जिंदगी नहीं जी सकता है और संमाज में लोग उसे सही नजरसे नहीं देखते हैं ।व्यक्ति में हीन भावना आ जाती है ,वह अपने आपको कोसने लगता है ।कुछ लोगों के मन में तो आत्महत्या जैसी भावना आने लगती है और वे निराश हो जाते हैं ,अवसाद ग्रस्त होकर अपना जीवन तक समाप्त कर लेते हैं ।

उपचार सामग्री :- (१) शुद्ध कौंच बीज -४० ग्राम  (२)अश्वगंधा घनसत्व -२० ग्राम  (३)चारों प्रकार की मूसली -८० ग्राम (४) शुक्र वल्लभ रस -६ ग्राम (५)सिद्ध मकरध्वज स्पेशल - ५ ग्राम (६) वज्र (भस्म हीरक )-१/४ ग्राम (७) स्वर्ण भस्म -१/४ ग्राम (८) सतावर चूर्ण -२० ग्राम 

दवा बनाने की विधि :--सबसे पहले शुक्रवल्लभ रस को घुटाई कर फिर मकरध्वज स्पेशल को पीस लें ,फिर हीरक भस्म ,स्वर्ण   भस्म को घुटाई कर बारीक करके फिर सतावर ,अश्वगंधा घनसत्व ,शुद्ध कौंच बीज ,चारों मुसलियों को मिलकर घोंट कर एक जान कर पूरे मिश्रण के बराबर मिश्री मिलकर ८० पुड़िया बना लें ।

सेवन विधि :-प्रातः दोपहर सायं एक गिलास दूध के साथ एक पुड़िया खाने से कुछ ही दिनों में वीर्य शुक्राणुओं से लबालव हो जायेगा ।

परहेज :-खट्टी ,तली-भुनी ,मिर्च मसाला ,सम्भोग ,से दूर एवं पेट साफ रखें ।


jalodar diseases

जलोदर लक्षण :- बीमारी में पेट में सूजन आ जाती है । पेट में पानी जमा हो जाता है,इसलिए इसे जलोदर के नाम से जाना जाता है ।पानी भरने से पेट का अगला भाग बढ़ने लगता है|श्वसन में परेशानी ,प्यास ,दिल धड़कना ,पेशाब का कम होना ,कब्ज ,पेट में पानी की आवाज हिलने -डुलने पर महसूस होना आदि इनके लक्षण हैं |

उपचार :-   (१)गोमूत्र अर्क और मकोय अर्क को दो -दो चम्मच साथ में पानी में मिलकर रोगी को पिलाने से जलोदर की बीमारी दूर हो जाती है ।

                (२)अजवाइन को गाय के बछड़े के मूत्र में भिंगोकर सुखाकर चूर्ण बना लें और चार -चार ग्राम रोगी को देने से जलोदर रोग नष्ट होता है ।               (३)बेलपत्र के ताजे पत्ते के स्वरस में दो से तीन तोला तक छोटी पीपली के चूर्ण के साथ मिलाकर सेवन करने से जलोदर की बीमारी दूर हो जाती है ।  

 


delay in menses

मासिक धर्म में देरी के कारण :-.मासिक धर्म संसार में प्रत्येक लड़की और महिला के शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया है और यह उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा भी है।कभी -कभी महिलाओं को मासिक धर्म में देरी की समस्या से भी गुजरना पड़ता है, जो उनके लिए बड़ा ही कष्टप्रद होता है।आजकल महिलायें मासिक धर्म को जल्दी या देरी से लाने का प्रयास करती हैं,जो उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालती हैं। मासिक धर्म में देरी के कुछ कारण निम्नलिखित हैं -

(१)हार्मोन में बदलाव 

(२)बीमारी जैसे -थायरॉइड ,पी.ओ.एस.(पोलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम ),सही पोषक तत्त्व न लेना आदि 

(३)तनाव 

(४)दवाइयों का प्रतिकूल प्रभाव 

उपचार :-

(१)एक चम्मच सौंफ चार चम्मच पानी में डालकर उबालें और फिर छानकर पानी को ठंडा कर दिन में थोड़ी -थोड़ी देर बाद पीने से मासिक धर्म समय पर आने लगता है।

(२)दालचीनी पॉउडर आधा चम्मच को दूध में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से मासिक धर्म नियमित हो जाता है और साथ ही ज्यादा रक्त स्राव भी नहीं होता है।  

(३)आधा चम्मच अदरक के रस को शहद में मिलाकर मासिक धर्म होने की तारीख से एक सप्ताह पहले खाना शुरू करने से देरी की समस्या से निजात मिल जाती है। 

(४)एक कटोरी पका पपीता या पपीता का जूस मासिक की तारीख से एक या दो सप्ताह पहले खाने या जूस पीने से मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाती है ।

(५)आधा चम्मच अरंडी के तेल से  पेट के निचले हिस्से की मालिश करें और १५-२० मिनट तक सिकाई मासिक धर्म के एक सप्ताह पहले से करें ।आपकी मासिक धर्म की सारी समस्या दूर हो जाएगी ।  


child weeping

बच्चों का बहुत रोना :-सभी शिशु रोते हैं ,यह बिलकुल सामान्य बात है।अधिकांश शिशु प्रत्येक दिन कुल एक घंटे से लेकर तीन घंटे तक के समय के लिए रोते हैं ;किन्तु जब शिशु ज्यादा रोये और चुप नहीं हो तो यह समझना चाहिए कि बच्चों को कुछ परेशानी है,शिशु तो बता नहीं सकता।वैसी स्थिति में जिस अंग को बालक बार -बार स्पर्श करे अथवा जिस स्थान को दबाने से बच्चा ज्यादा रोये ,वही स्थान पीड़ा का हो सकता है ,यह समझना चाहिए और उसका समुचित उपचार करना चाहिए। 

उपचार :-पीपर और    त्रिफला का चूर्ण घी तथा शहद (असमान भाग ) के साथ चटाने से बच्चों का रोना और चौंकना आराम हो जाता है । 


sukha rog

सूखा रोग :-सूखा रोग (रिकेट्स )अस्थियों का रोग है ,जो अधिकांशतः बच्चों में पाया जाता है।इस बीमारी में बच्चों में हड्डियाँ नरम और कमजोर हो जाती हैं।परिणामस्वरूप अस्थिविकार के कारन पैरों में टेढ़ापन और मेरुदंड में मोड़ आ जाता है।

लक्षण :-विटामिन डी कि कमी ,दाँतों कि समस्या ,कंकाल विकृति ,अस्थि भंगुरता ,विकास में बाधा,हड्डियों का दर्द ,पेशीय कमजोरी आदि सूखा रोग के प्रमुख लक्षण हैं

कारण:-सूखा रोग लम्बे समय तक विटामिन डी की कमी के कारण होता है।कैल्सियम एवं फास्फोरस की कमी भी सूखा रोग का कारण है। 

उपचार :-बिदारिकाण्ड ,गेहूँ ,और जौ का आटा घी में मिलाकर खिलाना चाहिए और दूध -मिश्री या शहद -दूध पिलाना चाहिए ।   


pasli harfa

पसली (पांजारा ),डब्बा और हरफा:-लक्षण :-यह छोटे बच्चों को प्रायः हो जाता है ।इसमें रोगी को ज्वर और खांसी होती है ,सांस लेने में कष्ट होता है और पसली में दर्द होता है ।

उपचार :-(१) जब बालक का पाखाना और पेशाब बंद जाये ,बुखार तेज हो और सांस चले तो गोंद बबूलऔर मुसब्बर समान भाग घी कुवार के रस में मिलाकर पेट पर गुनगुना लेप करना चाहिए ।   

(२) कबीला -८ भाग और हींग -१ भाग दोनोंको बारीक पीसकर दही के तोड़ के साथ गोली मिर्च के समान बना कर गर्म जल के साथ देने से रोग नष्ट होता है ।


afra vayu

अफरा एवं वायु रोग :- उपचार:- बच्चों के अफरा एवं वायु रोग में सेंधा नमक ,सोंठ ,हींग और भारंगी का बारीक चूर्ण घी के साथ चाटने से पेट का फूलना और दर्द का शमन होता है ।  


mahapadmak

महापद्मक :-लक्षण :-बच्चों में यह रोग मूत्राशय एवं मस्तक में होता है।यह एक प्रकार का बिसर्प रोग है ।इसमें कभी लाल कभी खर्दरी काँटोवाला 

कोई नीला और लाल मिश्रित बुझे हुए अंगारे के समान फुंसियां होतीं हैं ।यह अत्यंत शीघ्रता से फैलता है ।रोगी की संज्ञा नष्ट हो जाती है और बच्चा बैचैन हो जाता है ।

लक्षण:- बच्चों का लगातार रोना,शरीर व चेहरे पर छोटे -छोटे दाने,बच्चे की साँस असामान्य होना ,बच्चों का दूध न पीना आदि महापद्मक बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। 

उपचार :-(१) बड़,गूलर ,पीपर ,पाकड़ ,वेंत ,जामुन ,मुलेठी ,मजीठ ,चन्दन खाश और पद्माख को बारीक पीसकर लेप करने से रोग नष्ट हो जाता है 


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