tundi

टुंडी :लक्षण:-( नाभि ,ढोड़ी)संक्रमण के कारण पक जाती है और ज्वर आ जाता है  । नाभि के आसपास के क्षेत्र को छूने या स्पर्श करने पर रोता है।

 सावधानी :-बच्चों के जन्म होने के समय नाभिनाल को काटने के बाद उसे ठीक होने में १०-१५ दिन का समय लगता है,इसलिए इसे सूखा रखना पड़ता है ,उसमें कोई तेल नहीं डालना होता है ,नाभि को छूने के पहले हाथ को अच्छी तरह साफ करना चाहिए ,बच्चों को स्नान कराते समय नाभि को पानी से बचाना चाहिए ,यदि स्नान कराना हो  तो स्पंज स्नान  कराना चाहिए और नाभि को मुलायम तौलिये से पोंछना चाहिए।इन सब बातों को ध्यान में रखकर टुण्डी बीमारी से बच्चों को बचाया जा सकता है।                                                        उपचार :(१)मिट्टी के ढेले को आग पर गरम कर दूध में बुझाकर सेंकने से नाभि की सूजन ठीक हो जाती है।

          (२)चिकनी सुपारी को पीसकर नाभि पर लगाने से नाभि की सूजन ठीक हो जाती है। :-इस रोग में तोंडी (ना

          (३)हल्दी को सरसों तेल में मिलाकर लगाने से भी नाभि की सूजन ठीक हो जाती है।


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