micro penis

लिंग का छोटापन :- भारतीय एवं दूसरे अन्य देशों के खासकर युवा वर्ग अपने लिंग के आकार को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं।इस कारण से वे मानसिक तनाव एवं अत्यंत परेशानी अनुभव करते हैं।वे यह सोचकर ज्यादा तनावग्रस्त रहते हैं कि उनका आगे की शादीशुदा जिंदगी लिंग के छोटेपन की वजह से ख़राब न हो जाये।वास्तव में लिंग की लम्बाई साढ़े तीन इंच की है तो आपकी शादीशुदा जिंदगी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा,क्योंकि स्त्री की योनि का ऊपरी एक तिहाई हिस्सा ही यौन स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है और उत्तेजित अवस्था में यदि लिंग दो सेंटीमीटर भी होता है तो वह अपने साथी को पर्याप्त यौन आनंद प्रदान करा पाने में समर्थ होता है। आयुर्वेद के अनुसार मालिश,लेप आदि के द्वारा लिंग के आकार में परिवर्तन लाया जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है।

लक्षण :- लिंग का आकार बहुत छोटा होना,छिपा हुआ दिखना,सामान्य की अपेक्षा छोटा होना आदि लिंग के छोटेपन के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- कुपोषण,आनुवंशिक कारण,धूम्रपान एवं शराब का अत्यधिक सेवन,आंशिक ऐड्रोजन असंवेदनशीलता,थायराइड हार्मोन,मोटापा,मधुमेह रोगी होना आदि लिंग के छोटेपन के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) जिंकयुक्त खाद्य पदार्थों जैसे - कद्दू के बीज,बीन्स,तरबूज के बीज,अखरोट,बादाम आदि के सेवन से लिंग का छोटापन दूर हो 

                   जाता है।

              (2) गाजर,केला, प्याज,ब्रोकली,टमाटर,शक्करकंद,चुकुन्दर,पालक,सेब,पपीता आदि के नियमित सेवन से भी लिंग का छोटापन दूर 

                   हो जाता है।

              (3) देशी घी या सरसों तेल की नियमित मालिश से लिंग का छोटापन दूर हो जाता है।

              (4) एक चम्मच जैतून के तेल में लौंग तेल की 15 बूंदें अच्छी तरह मिलाकर लिंग के ऊपरी हिस्से को छोड़कर मालिश करने से लिंग 

                    का छोटापन दूर हो जाता है।

              (5) पिसे हुए हींग में देशी घी को मिलाकर लेप बना लें और रात को सोते समय लिंग के ऊपरी भाग को छोड़कर लेप करने और 

                   सुबह गर्म जल से धो लेने पर कुछ ही दिनों में लिंग का छोटापन दूर हो जाता है।

              (6) बेलपत्र के ताजे पत्ते का रस निकलकर उसे शहद के साथ मिलाकर लगाने से भी लिंग का छोटापन दूर हो जाता है।

              (7) सहजन के 15 ग्राम फूलों को 300 ग्राम दूध में उबालकर सूप बनाकर पीने से लिंग का छोटापन दूर हो जाता है।

              (8) एक छोटा चम्मच शहद में चुटकी भर हींग को मिलाकर लिंग मुंड को छोड़कर बांकी हिस्से पर लगाने और आधा घंटे बाद धो 

                   लेने से कुछ ही दिनों में लिंग का छोटापन ठीक हो जाता है।

               

              


erectile dysfunction

स्तंभन दोष :- स्तंभन दोष पुरुषों में होने वाली एक आम बीमारी है,जो आज के वर्तमान परिवेश में आम समस्या के रूप में परिलक्षित होता है।यह एक प्रकार की यौन निष्क्रियता की स्थिति है,जो सम्भोग या सहवास के दौरान लिंग उत्तेजित होने या तनाव बनाये न रख पाने के कारन होती है।दूसरे शब्दों में स्तंभन से अभिप्राय लिंग में कड़ापन एवं आकार में बढ़ने से है,जो सम्भोग की इच्छा होने पर शिश्न के उत्तेजित होने के समय होता है और शिश्न स्वतः फ़ैल जाती है और उसमें रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और लिंग में कठोरता आ जाती है।स्तंभन वास्तव में सम्भोग के लिए आवश्यक है।

लक्षण :- सेक्स के लिए पुरुष के लिंग में पर्याप्त तनाव या कसावट न होना,कम समय तक तनाव या कसावट रहना,बहुमूत्र की शिकायत,समय से पहले स्खलन,सेक्स की इच्छा में कमी,तंत्रिका तंत्र की विकृति,अधूरी यौन क्रिया,अवसाद,चिंता,थकान आदि स्तंभन दोष के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- मधुमेह,तंत्रिका सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त होना,मानसिक नपुंसकता,टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन्स की कमी,दृश्य - श्रव्य सामग्री में अश्लीलता का बढ़ता प्रचलन,फ़ास्ट फ़ूड का अत्यधिक प्रयोग,आनुवांशिक कारण,रक्तचाप,प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना,धूम्रपान का अधिक प्रयोग,शराब का अधिक सेवन आदि स्तंभन दोष के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) कस्तूरी व सोने के वर्क एक -एक ग्राम,एक ग्राम चांदी के वर्क,इलायची 10  ग्राम,जटामांसी,लौंग,तेजपात पांच -पांच ग्राम,पीपल 

                   और सोंठ दो -दो ग्राम। सबको कूट पीस शहद के साथ खरल कर छोटी-छोटी गोलियां बना लें और सुबह - शाम दो-दो गोलियां 

                   शहद के साथ लेकर ऊपर से गुनगुना दूध पीने से स्तंभन दोष निःसंदेह दूर हो जाता है,यह अनुभूत औषधि है।

(2) लहसुन की तीन-चार कलियों को शहद के साथ चबाकर खाने से स्तंभन दोष दूर हो जाता है।

(3) बादाम को घिसकर गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से स्तंभन दोष दूर हो जाता है।

(4) सफ़ेद प्याज के टुकड़े करके धीमी आंच पर मक्खन में भून लें और प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करने से स्तंभन दोष दूर हो जाता है।

(5) अनार,चुकुन्दर एवं गाजर के रस के सेवन से भी स्तंभन दोष दूर हो जाता है।

(6) गूलर के दूध में बताशे को भिंगो कर सुबह -शाम खाने से स्तंभन दोष दूर हो जाता है,इसमें कोई संदेह नहीं है।

(7) बरगद के दूध में बताशे को भिंगो कर सुबह शाम खाने से स्तंभन दोष दूर हो जाता है।

(8) धूम्रपान, शराब के सेवन न करने से भी स्तंभन दोष ठीक हो जाता है।

(9) मधुमेह को नियंत्रित कर बह स्तंभन दोष से बचा जा सकता है।

(10) मछली एवं नट्स आदि के सेवन से भी स्तंभन दोष से मुक्त हो सकते हैं।


loss of sexual stamina disease

मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति का ह्रास रोग :- मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति का ह्रास  होना आज के वर्तमान परिवेश में एक आम समस्या के रूप में परिलक्षित होता है।आज खान - पान,रहन- सहन,एवं आधुनिकता के दौर में शामिल होकर मनुष्य पश्चिमी सभ्यता का बन्दर नक़ल करके अपने स्वास्थ्य का बेड़ा गर्क कर लिया है। साथ ही रही सही आज के अश्लील दृश्य - श्रव्य सामग्री ने पूरा कर दिया है।इसके अतिरिक्त पर्यावरणीय असंतुलन एवं प्रदूषण की समस्या भी एक प्रमुख कारक है।वास्तव में मनुष्य में पौरुष शक्ति टेस्टोस्टेरॉन नामक हार्मोन के कारन होता है।टेस्टोस्टेरॉन का स्तर ही उसके सामाजिक व्यवहारों को प्रभावित करता है।स्तनपाइयों में टेस्टोस्टेरॉन मुख्यतः नरों में अंडकोष से व मादाओं में अंडाशय से स्रावित होता है।यह नर सेक्स हार्मोन पुरुषों में यौन लक्षणों के विकास कोदाम्पत्य संबंधों के अतिरिक्त व्यवसाय,वे गति प्रदान करता है और यौन क्रिया कलापों,रक्त संचरण एवं मांसपेशियों के साथ-साथ एकाग्रता,स्वभाव एवं याददाश्त को प्रभावित करता है।हाल के वषों में पति -पत्नी,घर-परिवार,तन आदि की अधिक चिंता का वातावरण बना है।फलस्वरूप व्यक्ति के अंदर टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट ही मर्दाना ताकत के ह्रास का प्रमुख कारण है।यह हार्मोन शुक्राणु उत्पादन के साथ-साथ आदमी की कामेच्छा को भी बढ़ाता है।

लक्षण :- मूड ख़राब होना,थकान महसूस करना,एकाग्रता में कमी,याददाश्त कमजोर होना,जल्दी आक्रामक हो जाना,गुस्सा आना,चिड़चिड़ापन,बाल झड़ना,वीर्य की मात्रा कम हो जाना,पसीना अधिक आना,स्तम्भन शक्ति कम हो जाना,चरम सुख प्राप्त करने में कठिनाई,सम्भोग की इच्छा में कमी आदि मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति का ह्रास रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- बढ़ती उम्र,पिट्यूटरी ग्रंथि का रोग,आनुवांशिक कारण,अंडकोष में संक्रमण,चोट या क्षति,फेफड़ो में सूजन,तनाव में रहना,मोटापा,गंभीर बीमारी,प्रोस्टेट कैंसर के इलाज की दवाएं,संतृप्त वसायुक्त आहार,धूम्रपान,अत्यधिक शराब का सेवन,आदि मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) बरगद के दूध में बताशे को भिगोंकर प्रतिदिन सेवन करने से मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।

              (2) ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त आहार नियमित सेवन करने से मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।

              (3) आयरन युक्त आहार जैसे-पालक,शलगम पत्तागोभी,ब्रोकली,मशरूम आदि आहार के सेवन से मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति 

                   का ह्रास रोग ठीक हो जाता है।

              (4) प्रतिदिन सुबह लहसुन की तीन-चार कलियों के सेवन से मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।

              (5) समुद्री खाद्य पदार्थों जैसे-मछली,केकड़ा आदि के सेवन भी टेस्टोस्टेरॉन को बढ़ाता है और लिंग वाहिकाओं में रक्त के संचार में 

                    सुधार लाकर मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग को ठीक करता है।

              (6) अखरोट,बादाम को प्रतिदिन आहार में शामिल करने से मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग दूर हो जाता है।

              (7) सूरजमुखी और अलसी के बीजों के सेवन से भी मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।

              (8) पर्याप्त नींद लेने से भी मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।

              (9) दूध में खजूर उबालकर खाने से भी मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।

              (10) लहसुन और शहद मिलकर खाने से भी मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग दूर हो जाता है।

              (11) इलायची के सेवन से भी मर्दाना ताकत या पौरुष शक्ति ह्रास का रोग ठीक हो जाता है।


premature ejaculation

शीघ्रपतन:-आज मनुष्य प्रदूषित वातावरण में शुद्ध हवा,पानी,खाद्य पदार्थ के बिना स्वस्थ नहीं है।फलस्वरूप वह अपने रोजमर्रा के प्रत्येक कार्यों को बखूबी नहीं कर पा रहा है।साथ ही आज प्रदूषित दृश्य -श्रव्य के साधनों (सिनेमा,अश्लील पत्र -पत्रिकाएं आदि)के कारण युवा अथवा प्रौढ़ आयु के विवाहित पुरुष यौन शक्ति में कमी का अनुभव करते हैं,स्तम्भन शक्ति न रखते हैं,यौनांग में शिथिलता का अनुभव करते हैं और सम्भोग या रति क्रिया में चरम सुख प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं ,नतीजन वह तनाव,कुंठाग्रस्त जीवन जीने के लिए बाध्य है।इन समस्याओं से मुक्ति हेतु मैंने एक प्रयास किया है, उम्मीद है पाठकजन लाभान्वित होंगे और अपना वैवाहिक जीवन को आनंदप्रद बनाएंगे।.                                         लक्षण :-सम्भोग करते समय वीर्य का शीघ्र स्खलन (गिर जाना)हो जाना ही शीघ्रपतन कहलाता है।शीघ्रपतन की सबसे ख़राब स्थिति यह होती है कि सम्भोग क्रिया शुरू होने से पहले ही वीर्यपात हो जाना। ऐसे में मनुष्य असंतुष्टि,ग्लानि,हीन-भावना,नकारात्मक विचारों से ग्रसित हो जाता है एवं अपना दाम्पत्य जीवन को टूटने के कगार पर ला देता है,जिससे जीवन-साथी के संबंधों में तनाव आना मुमकिन है।

उपचार:-(1 )दूध और पानी के साथ तुख्मलंगा की खीर बनाकर खाने से वीर्य का स्तम्भन होता है और शक्ति बढ़ती है।यह अचूक एवं अनुभूत है।

             (2 )अकरकराहा,सोंठ,कंकोल,केशर,पीपर,जायफल ,लौंग और चन्दन सफ़ेद चार -चार तोला बारीक कूट पीस कपड़छान कर चूर्ण बनाकर और सबके बराबर शक्कर मिलाकर उसमें एक तोला चोखी अफीम  मिला दें।चूर्ण को एक मास शहद के साथ चाटने से वीर्य का स्तम्भन करता है और स्त्री -पुरुष दोनों का अद्भुत आनंद आता है।यह अनुभूत एवं अचूक औषधि है और 100 प्रतिशत फल देने वाला है।

            (3)तुलसी के बीज को १०० ग्राम की मात्रा में लेकर उसे बारीक कूट पीस कपड़छान कर रख लें और एक चम्मच रात को सोते समय गुनगुने दूध के साथ पंद्रह दिनों तक लेने से शीघ्रपतन की समस्या शतप्रतिशत दूर हो जाएगी इसमें कोई संदेह नहीं। 


high blood pressure

उच्च रक्तचाप :मानव शरीर में रक्तचाप का स्तर सामान्य अवस्था में 80 -120 के बीच होता है।शरीर में सामान्य रक्तचाप यानि दबाव ज्यादा होना ही उच्च रक्तचाप कहलाता है ।धमनियों में रक्त का दाबाव बढ़ जाने से रक्त का प्रभाव समुचित रखने के लिए हृदय को सामान्य रूप से अधिक कार्य करना पड़ता है ,जो कभी -कभी जानलेवा साबित होता है । उच्च रक्तचाप जीवन शैली में एक आम समस्या बन गई है ।

लक्षण:तनाव होना,सिर चकराना,थकावट होना,नाक से खून आना,नींद न आना,हृदय की धड़कन बढ़ना आदि 

उपचार:-जटामांसी,ब्राह्मी और अश्वगंधा चूर्ण समान भाग मिलाकर एक- एक चम्मच दिन में तीन बार लेने से उच्च रक्तचाप की समस्या से राहत मिलती है ।   

 


swapndosh

स्वप्नदोष :-आज मानव आधुनिक जीवन शैली को अपनाने के क्रम में दृश्य -श्रव्य साधनों को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा बना लिया है ।दृश्य -श्रव्य साधनों जैसे  सिनेमा ,टेलीविजन ,पत्र -पत्रिकाओं में नग्नता ,अश्लीलता  का बोलवाला हो गया है ,जिसे विश्व जनमानस बड़ी सहजता से स्वीकार कर लिया है ;जिसका प्रभाव उनके मन-मस्तिष्क में अपना स्थायी निवास बना लिया है ।

लक्षण :-मनुष्य के रात में सोने के उपरांत तमाम प्रकार की विचारधाराएं मानव मस्तिष्क में कामोत्तेजक विचारों के रूप में नग्न,अश्लील चित्रों के आ जाने ही उनके जननांगों में उत्तेजना आ जाती है ,परिणामस्वरूप वीर्य स्खलित (निकल जाना )हो जाता है ,जिसे मानव समुदाय स्वप्नदोष का नाम देते हैं।

उपचार :-(१)चक्रफूल (स्टार ऐनिस)के तेल का मसाज करने से चिंता ,तनाव ,दूर भागते हैं और मन को शांति एवं सुकून मिलता है ,फलस्वरूप नींद अच्छी आती है,और मन में नकारात्मक विचार नहीं आने से स्वप्नदोष नहीं होता है ।

 (२)सेमर का मूसरा (जड़ )को बारीक कूट पीस कपड़छान कर खाने से वीर्य पत्थर के सामान मजबूत हो जाता है और स्वप्नदोष की समस्या दूर हो जाती है \

(३)आठ  तोला काळा तिल, छः टोला दाना पोस्त ,चार तोला बिनौला की गिरी औरदो तोला मग्ज तुख्म कर्र सबको बारीक कूट पीस कपड़छान कर दूनी शक्कर मिला कर रख लें और एक तोला गाय के दूध के साथ लेने से स्वप्नदोष नहीं होगा ।


low sperm count

वीर्य में शुक्राणुओं की कमी :- वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होने पर व्यक्ति संतान पैदा करने में असमर्थ रहता है ,जिससे वह सम्मानजनक जिंदगी नहीं जी सकता है और संमाज में लोग उसे सही नजरसे नहीं देखते हैं ।व्यक्ति में हीन भावना आ जाती है ,वह अपने आपको कोसने लगता है ।कुछ लोगों के मन में तो आत्महत्या जैसी भावना आने लगती है और वे निराश हो जाते हैं ,अवसाद ग्रस्त होकर अपना जीवन तक समाप्त कर लेते हैं ।

उपचार सामग्री :- (१) शुद्ध कौंच बीज -४० ग्राम  (२)अश्वगंधा घनसत्व -२० ग्राम  (३)चारों प्रकार की मूसली -८० ग्राम (४) शुक्र वल्लभ रस -६ ग्राम (५)सिद्ध मकरध्वज स्पेशल - ५ ग्राम (६) वज्र (भस्म हीरक )-१/४ ग्राम (७) स्वर्ण भस्म -१/४ ग्राम (८) सतावर चूर्ण -२० ग्राम 

दवा बनाने की विधि :--सबसे पहले शुक्रवल्लभ रस को घुटाई कर फिर मकरध्वज स्पेशल को पीस लें ,फिर हीरक भस्म ,स्वर्ण   भस्म को घुटाई कर बारीक करके फिर सतावर ,अश्वगंधा घनसत्व ,शुद्ध कौंच बीज ,चारों मुसलियों को मिलकर घोंट कर एक जान कर पूरे मिश्रण के बराबर मिश्री मिलकर ८० पुड़िया बना लें ।

सेवन विधि :-प्रातः दोपहर सायं एक गिलास दूध के साथ एक पुड़िया खाने से कुछ ही दिनों में वीर्य शुक्राणुओं से लबालव हो जायेगा ।

परहेज :-खट्टी ,तली-भुनी ,मिर्च मसाला ,सम्भोग ,से दूर एवं पेट साफ रखें ।


jalodar diseases

जलोदर लक्षण :- बीमारी में पेट में सूजन आ जाती है । पेट में पानी जमा हो जाता है,इसलिए इसे जलोदर के नाम से जाना जाता है ।पानी भरने से पेट का अगला भाग बढ़ने लगता है|श्वसन में परेशानी ,प्यास ,दिल धड़कना ,पेशाब का कम होना ,कब्ज ,पेट में पानी की आवाज हिलने -डुलने पर महसूस होना आदि इनके लक्षण हैं |

उपचार :-   (१)गोमूत्र अर्क और मकोय अर्क को दो -दो चम्मच साथ में पानी में मिलकर रोगी को पिलाने से जलोदर की बीमारी दूर हो जाती है ।

                (२)अजवाइन को गाय के बछड़े के मूत्र में भिंगोकर सुखाकर चूर्ण बना लें और चार -चार ग्राम रोगी को देने से जलोदर रोग नष्ट होता है ।               (३)बेलपत्र के ताजे पत्ते के स्वरस में दो से तीन तोला तक छोटी पीपली के चूर्ण के साथ मिलाकर सेवन करने से जलोदर की बीमारी दूर हो जाती है ।  

 


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