पौरुष ग्रंथि कैंसर रोग : - पौरुष ग्रंथि कैंसर पुरुषों में होने वाली एक अत्यंत गंभीर एवं खतरनाक रोग है।प्रोस्टेट ग्रंथि पुरुष के मूत्राशय एवं लिंग के मध्य पाया जाता हैं। इस ग्रंथि का मुख्य कार्य शुक्राणुओं को संरक्षण एवं पोषण प्रदान करना हैं।  वैसे तो पौरुष ग्रंथि में कई प्रकार की कोशिकाएँ पाई जाती हैं,किन्तु एडिनोकार्सिनोमा कोशिका में प्रोस्टेट कैंसर विकसित होती हैं। वास्तव में प्रोस्टेट ग्रंथि में स्थित कोशिकाओं में असामान्य रूप से वृध्दि होने लगती हैं और परिणामस्वरूप ट्यूमर का रूप धारण कर लेती हैं। प्रारम्भ में यह कैंसर बहुत धीरे -धीरे बढ़ता है और इसके लक्षण ज्यादातर रोगियों में परिलक्षित नहीं होते हैं जब तक कियह गंभीर स्तर पर नहीं पहुँच जाता। आजकल प्रोस्टेट कैंसर की दर तीव्र गति से अपना पाँव पसार रही हैं और जानलेवा साबित हो रही हैं। अपने देश भारत के दिल्ली,कोलकाता आदि शहरों के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर पाया जाने वाला सबसे गंभीर रोग हैं। 

लक्षण :- बार - बार पेशाब आना,पेट दर्द,पेशाब में जलन,पेशाब रुक -रुक कर आना,सेक्स में अरुचि,मूत्र विसर्जन के बाद भी शेष रह जाना,अंडकोष में दर्द,मूत्र पर नियंत्रण न रख पाना,मानसिक दबाव,पेशाब में खून आना,पीठ के नीचे वाले भाग में दर्द,शारीरिक कमजोरी का अनुभव,भूख न लगना,यौन क्रिया में परेशानी,वजन कम होना आदि पौरुष ग्रंथि कैंसर के मुख्य लक्षण हैं। 

कारण : - अधिक उम्र का होना,आनुवांशिक कारण,अनियमित जीवनचर्या,मूत्र के वेग को रोकना,पेट का साफ़ न होना,मधुमेह,उच्च रक्तचाप ,अत्यधिक धूम्रपान,शराब का सेवन,अधिक वजन आदि पौरुष ग्रंथि कैंसर के प्रमुख कारण हैं। 

उपचार :- (1 ) हरीतकी एवं हल्दी चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से प्रोस्टेट ग्रंथि कैंसर ठीक हो जाता है। 

(2 ) लौकी के जूस में तुलसी की कुछ पत्तियां एवं काली मिर्च के चूर्ण को मिलाकर सेवन करने से पौरुष ग्रंथि कैंसर में अत्यंत लाभ होता है। 

(3 ) गिलोय एवं तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर सुबह शाम खाली पेट पीने से पौरुष ग्रंथि कैंसर में बहुत लाभ होता है। 

(4 ) पुनर्नवा स्वरस के सुबह शाम सेवन से पौरुष ग्रंथि कैंसर में बहुत लाभ मिलता है। 

(5 ) नोनी जूस 20 एम एल की मात्रा प्रतिदिन सुबह शाम खाली पेट पीने से पौरुष ग्रंथि कैंसर समूल नष्ट हो जाता है। 

(6 ) गोखरू एवं कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पौरुष ग्रंथि कैंसर में अत्यंत लाभप्रद है। 

(7 ) मक्के के रेशे को पानी में उबालकर पीने से पौरुष ग्रंथि कैंसर एवं पौरुष ग्रंथि के बढ़ जाने या सिकुड़ जाने से उत्पन्न परेशानी में अत्यंत रामबाण काम करता है। 

(8 ) तुलसी स्वरस एवं शहद मिलाकर सेवन करने से पौरुष ग्रंथि कैंसर में बहुत लाभ मिलता है। 

योग,आसन एवं प्राणायाम : - अनुलोम -विलोम,कपालभाति,भ्रामरी,अश्वनी मुद्रा आदि। 


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