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टुंडी रोग : - टुंडी रोग नवजात शिशुओं को होने वाला एक गंभीर रोग है,जिसमें शिशु की नाभि ( ढोड़ी या टुंडी ) संक्रमण के कारण पक जाती है। चूँकि नवजात की नाभि गर्भनाल से जुड़ी होती है और जन्म के साथ ही इसे काटा जाता है। काटते समय या बाद में संक्रमण की वजह से टुंडी या ढोड़ी का पाक जाना अत्यंत गंभीर एवं खतरनाक सिद्ध हो सकता है। अतः टुंडी के पक जाने पर उसके इलाज की तुरंत आवश्यकता होती है। उपचार न होने की स्थिति में टुंडी का पकना नवजात शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। 

लक्षण : - नाभि का पक जाना,नाभि के आस पास सूजन,दर्द,ज्वर आदि नाभि के आसपास के क्षेत्र को छूने या स्पर्श करने पर रोना टुंडी रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - नाभि में संक्रमण हो जाना,स्वच्छता का अभाव,संक्रमित हाथों से छूना,जीवाणुओं का संक्रमण, माता का गलत खान -पान आदि टुंडी रोग के मुख्य कारण हैं। 

 सावधानी :-बच्चों के जन्म होने के समय नाभिनाल को काटने के बाद उसे ठीक होने में १०-१५ दिन का समय लगता है,इसलिए इसे सूखा रखना पड़ता है ,उसमें कोई तेल नहीं डालना होता है ,नाभि को छूने के पहले हाथ को अच्छी तरह साफ करना चाहिए ,बच्चों को स्नान कराते समय नाभि को पानी से बचाना चाहिए ,यदि स्नान कराना हो  तो स्पंज स्नान  कराना चाहिए और नाभि को मुलायम तौलिये से पोंछना चाहिए।इन सब बातों को ध्यान में रखकर टुण्डी बीमारी से बच्चों को बचाया जा सकता है। 

उपचार :(1) मिट्टी के ढेले को आग पर गरम कर दूध में बुझाकर सेंकने से नाभि की सूजन ठीक हो जाती है।

(2) चिकनी सुपारी को पीसकर नाभि पर लगाने से नाभि की सूजन ठीक हो जाती है। :-इस रोग में तोंडी (ना

 (3) हल्दी को सरसों तेल में मिलाकर लगाने से भी नाभि की सूजन ठीक हो जाती है।

(4) हल्दी,लोध,प्रियंगु एवं मुलेठी को पानी के साथ पीस कर लुगदी बनाकर नाभि पर लेप करने से टुंडी रोग ठीक हो जाता है। 

(5) बुरादा चन्दन खूब बारीक पिसा हुआ नाभि पर बुरकने से टुंडी रोग ठीक हो जाता है। 

(6) एंटी बैक्टीरियल बोरिक पाउडर को नाभि पर बुरकने से भी टुंडी रोग ठीक हो जाता है।

 


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